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भगवान राम की मौत कैसे हुई ??

इस दुनिया में आने वाला इंसान अपने जन्म से पहले ही अपनी मृत्यु की तारीख यम लोक में निश्चित करके आता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि जो आत्मा सांसारिक सुख भोगने के लिए संसार में आई है, वह एक दिन वापस जरूर जाएगी, यानी कि इंसान को एक दिन मरना ही है। लेकिन इंसान और ईश्वर के भीतर एक बड़ा अंतर है। इसलिए हम भगवान के लिए मरना शब्द कभी इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि इसके स्थान पर उनका इस ‘दुनिया से चले जाना’ या ‘लोप हो जाना’, इस तरह के शब्दों का उपयोग करते हैं। हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के महान अवतार प्रभु राम के इस दुनिया से चले जाने की कहानी काफी रोचक है। हर एक हिन्दू यह जानना चाहता है कि आखिरकार हिन्दू धर्म के महान राजा भगवान राम किस तरह से दूसरे लोक में चले गए। वह धरती लोक से विष्णु लोक में कैसे गए इसके पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। हिन्दू धर्म के प्रमुख तीन देवता - ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश में से भगवान विष्णु के कई अवतारों ने विभिन्न युग में जन्म लिया। यह अवतार भगवान विष्णु द्वारा संसार की भलाई के लिए लिए गए थे। भगवान विष्णु द्वारा कुल 10 अवतारों की रचना की गई थी, जिसमें से भगवान राम सातवें अ…

SCINCE OF HUMAN BODY

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1. मूलाधार चक्र :
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यह शरीर का पहला चक्र है।
गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला यह "आधार चक्र" है।99.9% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती हैऔर वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं।जिनके जीवन में भोग,काम और निद्रा की प्रधानता है,उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आस पास एकत्रित रहती है।
मंत्र : "लं"
चक्र जगाने की विधि:-मनुष्य तब तक पशुवत है, जब तक कि वह इस चक्र में जी रहा है.!
इसीलिए भोग, निद्रा और काम पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है I यम.और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव में रहना।
प्रभाव : इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतर वीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जाग्रत हो जाता है।
सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीरता,निर्भीकता और जागरूकता का होना जरूरी है।
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2. स्वाधिष्ठान चक्र  -
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यह वह चक्र है,जो लिंग मूल से चार अंगुल ऊपर स्थित है,
जिसकी छ: पंखुरियां हैं।
अगर आपकी ऊर्जा इस चक्र पर ही एकत्रित है,तो आपके जीवन में आमोद-प्र…

तुलसी कौन थी?

तुलसी(पौधा) पूर्व जन्म मे एक लड़की थी जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्त थी.बड़े ही प्रेम से भगवान की सेवा, पूजा किया करती थी.जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया। जलंधर समुद्र से उत्पन्न हुआ था. वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी सदा अपने पति की सेवा किया करती थी. एक बार देवताओ और दानवों में युद्ध हुआ जब जलंधर युद्ध पर जाने लगे तो वृंदा ने कहा - स्वामी आप युद्ध पर जा रहे है आप जब तक युद्ध में रहेगे में पूजा में बैठ कर आपकी जीत के लिये अनुष्ठान करुगी,और जब तक आप वापस नहीं आ जाते, मैं अपना संकल्प नही छोडूगी। जलंधर तो युद्ध में चले गये,और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गयी, उनके व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को ना जीत सके, सारे देवता जब हारने लगे तो विष्णु जी के पास गये। सबने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान कहने लगे कि – वृंदा मेरी परम भक्त है में उसके साथ छल नहीं कर सकता । फिर देवता बोले - भगवान दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है अब आप ही हमारी मदद कर सकते है। भगवान ने जलंधर का ही रूप रखा और वृंदा के मह…